लापरवाही साबित करने का भार बैंक पर, ग्राहक पर नहीं (Burden of Proof on Bank)
₹2,40,000 पूर्ण मूलधन वापसी + 9% वार्षिक ब्याज + ₹15,000 विधिक व्ययकेस के तथ्य (Facts): याचिकाकर्ता के बचत बैंक खाते से बिना उसकी जानकारी के कई अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन के जरिए ₹2.4 लाख की निकासी हो गई। बैंक ने दावा किया कि लेनदेन ग्राहक के पंजीकृत मोबाइल पर भेजे गए ओटीपी के माध्यम से हुए थे, इसलिए ग्राहक ने लापरवाही से पासवर्ड साझा किया होगा। बैंक ने रिफंड देने से मना कर दिया।
कोर्ट/लोकपाल का फैसला (Holding): केरल उच्च न्यायालय ने बैंक की दलील खारिज करते हुए फैसला दिया कि भारतीय रिज़र्व बैंक के 6 जुलाई 2017 के सर्कुलर के तहत यह साबित करने की पूरी कानूनी जिम्मेदारी बैंक की है कि ग्राहक ने क्रेडेंशियल्स साझा किए थे। मात्र यह कह देना कि ओटीपी भेजा गया था, बैंक को उसकी सुरक्षा जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता। अदालत ने बैंक को ब्याज सहित पूरी रकम लौटाने का आदेश दिया।