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धारा 138 एनआई एक्ट (Section 138 NI Act, 1881)•सुप्रीम कोर्ट 2025 नए नियम
Read in English: Section 138 Timeline Guide →

चेक बाउंस: नोटिस, भुगतान और केस — हर समय सीमा एक जगह

⚡ सीधा जवाब (Statutory Quick Answer — Section 138 & 142 NI Act)

चेक बाउंस होने के बाद बैंक से ‘रिटर्न मेमो’ (Return Memo) मिलने की तारीख से ठीक 30 दिनों के भीतर देनदार को वकील के माध्यम से डिमांड नोटिस भेजना अनिवार्य है (Section 138(b) NI Act)। नोटिस मिलने के बाद देनदार को भुगतान के लिए 15 दिन का समय मिलता है (Section 138(c))। यदि 15 दिन में पैसा न मिले, तो 16वें दिन से 1 महीने (30 दिन) के भीतर मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दायर करना होता है (Section 142(1)(b))।

चेक की वैधता (Validity)

3 महीने (90 दिन)

Section 138 Proviso (a) व RBI नियम
लीगल नोटिस समय सीमा

30 दिन के भीतर

बैंक रिटर्न मेमो मिलने से (Sec 138(b))
भुगतान की मोहलत

15 दिन का समय

नोटिस डिलीवर होने के बाद (Sec 138(c))
कोर्ट में केस दायर करना

1 महीना (30 दिन)

15 दिन समाप्त होने के बाद (Sec 142)
🧮 अपनी अंतिम तारीख की गणना करें (Deadline Calculator) →
वैधानिक समय सारिणी • Section 138 & Section 142 NI Act

चेक बाउंस समय सीमा तालिका: चेक जमा करने से लेकर कोर्ट केस तक (Timeline Table)

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 और धारा 142 (Sections 138 & 142 of the Negotiable Instruments Act, 1881) में चेक बाउंस का मुकदमा चलाने के लिए 4 क्रमिक समय सीमाएं निर्धारित हैं। यदि इनमें से किसी भी एक चरण में देरी होती है, तो आपकी आपराधिक शिकायत खारिज हो सकती है। नीचे दी गई तालिका में हर चरण की सटीक समय सीमा, उसकी गणना का नियम और लागू कानूनी धारा स्पष्ट रूप से दी गई है:

चरण (Stage)कानूनी समय सीमा (Time Limit)गिनती कब से शुरू होती है?लागू धारा (Statutory Section)समय चूकने पर क्या होगा?
1. बैंक में चेक जमा करना (Cheque Presentation)3 महीने (90 दिन)चेक के ऊपर लिखी तारीख (Date on Cheque) सेSection 138 Proviso (a) NI Act एवं RBI सर्कुलरचेक ‘Stale’ (कालातीत) हो जाएगा; धारा 138 लागू नहीं होगी।
2. लीगल डिमांड नोटिस भेजना (Legal Demand Notice)30 दिन के भीतरबैंक से रिटर्न मेमो मिलने वाले दिन को छोड़कर अगले दिन सेSection 138 Proviso (b) NI Actउस मेमो पर धारा 138 का अधिकार खत्म (यदि 3 माह शेष हैं तो चेक दोबारा लगाएं)।
3. देनदार द्वारा भुगतान का समय (Cure / Payment Window)15 दिन का समयदेनदार को नोटिस मिलने (Delivery / Refusal) के अगले दिन सेSection 138 Proviso (c) NI Act15 दिन में भुगतान होने पर केस बंद; न होने पर 16वें दिन अपराध गठित।
4. मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दायर करना (Filing Complaint)1 महीना (30 दिन)15 दिन की भुगतान अवधि समाप्त होने के ठीक अगले दिन (16वें दिन) सेSection 142(1)(b) NI Actदेरी होने पर Section 142(1)(b) Proviso के तहत माफी की अर्जी लगानी होगी।
5. अंतरिम मुआवजा भुगतान (20% Interim Compensation)60 दिन (+30 दिन छूट)मजिस्ट्रेट द्वारा धारा 143A का आदेश पारित होने की तारीख सेSection 143A NI Actजमा न करने पर भू-राजस्व (Section 421 CrPC / Sec 461 BNSS) की तरह कुर्की।
6. समानांतर सिविल वसूली दावा (Civil Summary Suit)3 वर्ष (3 Years)चेक की तारीख या बाउंस मेमो की तारीख सेOrder XXXVII CPC & Limitation Act, 1963यदि धारा 138 की समय सीमा निकल गई हो, तब भी 3 साल तक वसूली संभव।

अंग्रेजी में विस्तृत समय-सारिणी पढ़ें: यदि आप या आपके अधिवक्ता अंग्रेजी में धारा 138 के नियमों का अध्ययन करना चाहते हैं, तो हमारी Section 138 Cheque Bounce Notice Timeline Guide देखें या सीधे Cheque Bounce Deadline Calculator का उपयोग करें।

सवाल-जवाब गाइड • धारा 138 के हर नियम का स्पष्ट उत्तर

चेक बाउंस नोटिस और केस से जुड़े 8 सबसे महत्वपूर्ण सवाल और उनके कानूनी जवाब

प्रश्न 1: चेक बाउंस होने के कितने दिन बाद नोटिस देना चाहिए और 30 दिन की गिनती कैसे होती है?

सीधा उत्तर:परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के परंतु (b) (Section 138 Proviso (b) NI Act) के तहत, बैंक से चेक बाउंस होने की आधिकारिक सूचना यानी ‘चेक रिटर्न मेमो’ (Cheque Return Memo) मिलने के ठीक 30 दिनों के भीतर देनदार को लिखित डिमांड नोटिस भेजना अनिवार्य है।

गिनती का महत्वपूर्ण नियम (Exclusion of First Day): अक्सर लोग यह गलती करते हैं कि जिस दिन चेक बैंक में जमा किया या जिस दिन SMS आया, उस दिन से गिनती शुरू कर देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने Saketh India Ltd. v. India Securities Ltd. (1999) 3 SCC 1 और संवैधानिक पीठ ने Econ Antri Ltd. v. Rom Industries Ltd. (2014) 11 SCC 769 में स्पष्ट किया है कि साधारण खंड अधिनियम की धारा 9 (Section 9 General Clauses Act, 1897) के अनुसार जिस दिन बैंक से रिटर्न मेमो प्राप्त होता है, उस पहले दिन को गिनती से बाहर रखा जाता है और अगले दिन से 30 कैलेंडर दिन गिने जाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपको 5 अक्टूबर को बैंक से रिटर्न मेमो मिला, तो आपकी 30 दिन की अवधि 6 अक्टूबर से शुरू होकर 4 नवंबर की मध्यरात्रि तक रहेगी।

प्रश्न 2: नोटिस भेजने के बाद देनदार को पैसे चुकाने के लिए कितने दिन का समय देना पड़ता है?

सीधा उत्तर: धारा 138 के परंतु (c) (Section 138 Proviso (c) NI Act) के अनुसार, जब देनदार को आपका कानूनी डिमांड नोटिस प्राप्त (Deliver) हो जाता है, तो उस तारीख के अगले दिन से उसे भुगतान करने के लिए पूरे 15 दिन का वैधानिक समय (Cure Period) देना अनिवार्य है।

ध्यान रखें कि यह 15 दिन का समय नोटिस भेजने (Dispatch) की तारीख से नहीं, बल्कि देनदार को नोटिस मिलने (Service/Receipt) की तारीख से गिना जाता है। यदि आप स्वयं हिंदी में नोटिस का प्रारूप देखना चाहते हैं, तो हमारा चेक बाउंस नोटिस फॉर्मेट हिंदी में (Section 138 Notice Format) जरूर देखें, जिसमें 15-दिन की वैधानिक चेतावनी की सटीक शब्दावली दी गई है।

प्रश्न 3: यदि 15 दिन पूरे होने से पहले ही कोर्ट में केस डाल दिया जाए तो क्या होगा?

सीधा उत्तर: सुप्रीम कोर्ट की 3-जजों की पीठ के ऐतिहासिक फैसले Yogendra Pratap Singh v. Savitri Pandey (2014) 10 SCC 713के अनुसार, 15 दिन की भुगतान अवधि समाप्त होने से पहले दायर किया गया कोई भी चेक बाउंस केस ‘समय-पूर्व’ (Premature Complaint) माना जाता है और कानून की नजर में अमान्य है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक नोटिस प्राप्ति के पूरे 15 दिन समाप्त नहीं हो जाते, तब तक धारा 138 के तहत अपराध का जन्म (Cause of Action) ही नहीं होता। यदि किसी ने जल्दबाजी में 12वें या 14वें दिन केस फाइल कर दिया है, तो मजिस्ट्रेट उस शिकायत पर संज्ञान नहीं ले सकते और शिकायतकर्ता को 15 दिन बीतने के बाद नई शिकायत (यदि आवश्यक हो तो देरी माफी के साथ) दायर करनी होगी।

प्रश्न 4: 15 दिन बीतने के बाद कोर्ट में केस कितने दिन में दर्ज करना होता है और क्या देरी माफ हो सकती है?

सीधा उत्तर: परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 142(1)(b) (Section 142(1)(b) NI Act) के तहत, 15 दिन की मोहलत समाप्त होने के ठीक अगले दिन (16वें दिन) से 1 महीने (30 दिन) के भीतर मजिस्ट्रेट कोर्ट में आपराधिक शिकायत दर्ज करना अनिवार्य है।

देरी की माफी (Condonation of Delay) का महत्वपूर्ण अंतर: कानून में 30-दिन के भीतर डिमांड नोटिस भेजने की समय सीमा में देरी माफ करने का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन कोर्ट में केस फाइल करने की 1-महीने की समय सीमा में यदि गंभीर बीमारी या किसी ठोस कारण से देरी हो जाती है, तो Section 142(1)(b) के परंतु (Proviso) के तहत मजिस्ट्रेट पर्याप्त कारण (Sufficient Cause) दिखाने पर देरी को माफ करके केस स्वीकार कर सकते हैं।

प्रश्न 5: क्या 3 महीने की वैधता के दौरान बाउंस हुए चेक को दोबारा बैंक में लगाया जा सकता है?

सीधा उत्तर: हां, बिल्कुल। सुप्रीम कोर्ट ने MSR Leathers v. S. Palaniappan (2013) 1 SCC 177 में निर्णय दिया है कि चेक पर अंकित तारीख से 3 महीने की वैधता अवधि के भीतर चेक को बैंक में कितनी भी बार प्रस्तुत किया जा सकता है।

यदि देनदार आपसे कहता है कि “चेक 10 दिन बाद दोबारा लगा लो, पैसे आ जाएंगे” और आपने पहली बार नोटिस नहीं भेजा या नोटिस भेजने के 30 दिन निकल गए, तो आप चेक की 3 महीने की वैधता खत्म होने से पहले उसे दोबारा बैंक में जमा कर सकते हैं। जब बैंक नया रिटर्न मेमो देगा, तो उस नई तारीख से आपको नोटिस भेजने के लिए पूरे 30 दिन का नया समय मिल जाएगा।

प्रश्न 6: क्या चेक बाउंस के क्रिमिनल केस (धारा 138) के साथ सिविल वसूली केस (Order 37 CPC) भी चल सकता है?

सीधा उत्तर: हां, भारतीय कानून के तहत एक ही बाउंस चेक पर आप धारा 138 का क्रिमिनल केस (2 साल जेल या दोगुना जुर्माना) और सिविल प्रक्रिया संहिता के Order 37 के तहत समरी सूट (ब्याज सहित कुर्की व वसूली) दोनों एक साथ चला सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने D. Purushotama Reddy v. K. Sateesh (2008) 8 SCC 505 में स्पष्ट किया है कि दीवानी और फौजदारी दोनों कार्यवाही एक साथ चलने में ‘दोहरे दंड’ (Double Jeopardy) की कोई बाधा नहीं है, बस एक कोर्ट में मिली राशि दूसरे कोर्ट के आदेश में समायोजित हो जाती है। इस विषय पर पूरी रणनीति पढ़ने के लिए हमारी विस्तृत गाइड Cheque Bounce Case and Civil Suit Together पढ़ें।

प्रश्न 7: सुप्रीम कोर्ट के 2025 के नए चेक बाउंस नियमों (Sanjabij Tari 2025 Guidelines) में क्या बदला है?

सीधा उत्तर: 25 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने Sanjabij Tari v. Kishore S. Borcar (2025 INSC 1158) में देश भर की अदालतों के लिए नए बाध्यकारी नियम लागू किए हैं (1 नवंबर 2025 से प्रभावी), जिनसे चेक बाउंस मामलों का निपटारा तेज हो गया है।

  • WhatsApp और ईमेल से ई-सम्मन अनिवार्य: शिकायत दर्ज करते समय ही शिकायतकर्ता को आरोपी का मोबाइल नंबर और ईमेल देना होगा ताकि कोर्ट पहले दिन ही डिजिटल सम्मन भेज सके।
  • ऑनलाइन भुगतान लिंक (QR/Bank Link): सम्मन के साथ ही आरोपी को ऑनलाइन भुगतान का विकल्प दिया जाएगा ताकि यदि वह तुरंत चेक राशि जमा कर दे तो केस पहली ही तारीख पर समाप्त हो सके।
  • समझौता शुल्क (Compounding Cost) में राहत: यदि आरोपी शुरुआती चरण (बचाव दर्ज करने से पहले) में समझौता करता है तो जुर्माना केवल 5%, गवाही से पहले 7.5%, और फैसले से पहले 10% रखा गया है। पूरी जानकारी के लिए Supreme Court 2025 Cheque Bounce Guidelines देखें।

प्रश्न 8: यदि चेक किसी कंपनी या फर्म का है, तो नोटिस किसे और कितने दिन में भेजना होगा?

सीधा उत्तर: परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 141 (Section 141 NI Act) के तहत, यदि चेक किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या पार्टनरशिप फर्म ने जारी किया है, तो 30 दिन के भीतर कंपनी के साथ-साथ उसके सभी सक्रिय निदेशकों (Directors) व हस्ताक्षरकर्ता को भी नोटिस भेजना अनिवार्य है।

सुप्रीम कोर्ट के Aneeta Hada v. Godfather Travels & Tours (2012) 5 SCC 661 फैसले के अनुसार, कंपनी को मुख्य आरोपी बनाए बिना केवल डायरेक्टर पर धारा 138 का मुकदमा नहीं चल सकता। इसलिए 30 दिन की समय सीमा के भीतर कंपनी के रजिस्टर्ड ऑफिस और डायरेक्टर्स के पते पर संयुक्त डिमांड नोटिस भिजवाएं (विस्तार से पढ़ें: Company Cheque Bounce & Directors Liability under Section 141)।

नोटिस व मुकदमे का रोडमैप • Section 138 Escalation Rail

चेक बाउंस होने के बाद नोटिस भेजने और कोर्ट केस की पूरी प्रक्रिया (Step-by-Step Process)

चेक बाउंस मामले में आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आपने समय सीमा के हर कदम पर सही दस्तावेज़ी सबूत तैयार किए हैं या नहीं। नीचे दिए गए फ्लोचार्ट में चेक जमा करने से लेकर धारा 143A के तहत 20% अंतरिम मुआवजे और अंतिम वसूली तक का पूरा कानूनी क्रम दर्शाया गया है:

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चरण 1: बैंक से आधिकारिक ‘चेक रिटर्न मेमो’ (Cheque Return Memo) प्राप्त करें

जैसे ही बैंक से चेक बाउंस का SMS आए, अपनी बैंक शाखा से मूल चेक और बैंक की मुहर व तारीख वाला Cheque Return Memo प्राप्त करें। मेमो में बाउंस का कारण (जैसे Funds Insufficient, Payment Stopped by Drawer, या Account Closed / Signature Differs) स्पष्ट लिखा होना चाहिए।

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चरण 2: 30 दिनों के भीतर वकील द्वारा धारा 138 डिमांड नोटिस भिजवाएं

रिटर्न मेमो मिलने के 30 दिन के अंदर अनुभवी अधिवक्ता के माध्यम से देनदार को वैधानिक नोटिस भेजें। नोटिस में चेक नंबर, तारीख, राशि, बाउंस का कारण और 15 दिन में भुगतान की स्पष्ट मांग होनी चाहिए। इसे रजिस्टर्ड स्पीड पोस्ट (पावती सहित) और साथ में WhatsApp व ईमेल से भेजें। आप हमारे लीगल नोटिस शुल्क (Legal Notice Charges) पृष्ठ पर पारदर्शी फीस देख सकते हैं।

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चरण 3: स्पीड पोस्ट डिलीवरी ट्रैक करें और पूरे 15 दिन प्रतीक्षा करें

इंडिया पोस्ट की वेबसाइट से ट्रैकिंग रिपोर्ट डाउनलोड करें। जिस दिन नोटिस डिलीवर हुआ (या देनदार ने लेने से मना किया), उसके अगले दिन से पूरे 15 दिन गिनें। इस दौरान यदि देनदार पूरा पैसा दे देता है तो मामला वहीं समाप्त हो जाता है।

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चरण 4: 16वें दिन से 1 महीने के भीतर मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दायर करें

15 दिन में भुगतान न मिलने पर उस कोर्ट में शिकायत दर्ज करें जहां आपका (शिकायतकर्ता का) बैंक खाता स्थित है (धारा 142(2) NI Act संशोधन, 2015)। शिकायत के साथ मूल चेक, मूल रिटर्न मेमो, नोटिस की प्रति, पोस्टल रसीद, ट्रैकिंग रिपोर्ट और शपथ पत्र (Pre-summoning Evidence Affidavit) संलग्न होता है।

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चरण 5: ई-सम्मन और धारा 143A के तहत 20% अंतरिम मुआवजे की मांग

कोर्ट आरोपी को सम्मन जारी करता है (2025 के सुप्रीम कोर्ट नियमों के तहत WhatsApp/Email से भी)। आरोपी के कोर्ट में पेश होने पर धारा 143A का आवेदन लगाकर तुरंत 20% अंतरिम मुआवजा प्राप्त करें। दोषसिद्ध होने पर आरोपी को अधिकतम 2 वर्ष का कारावास या चेक राशि के दोगुने तक जुर्माने की सजा होती है।

न्यायिक नजीर • Landmark Supreme Court Judgments

चेक बाउंस की समय सीमा पर सुप्रीम कोर्ट के 4 ऐतिहासिक फैसले

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 138 और 142 की समय सीमा की गणना को लेकर सभी भ्रम दूर कर दिए हैं। नीचे दिए गए चारों फैसलों का उल्लेख हमारे एडवोकेट आपके डिमांड नोटिस में भी करते हैं ताकि देनदार किसी तकनीकी बहाने का सहारा न ले सके:

Saketh India Ltd. v. India Securities Ltd., (1999) 3 SCC 1

30 दिन और 1 महीने की गिनती में पहला दिन छोड़ने का नियम

सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित किया कि जिस दिन बैंक से रिटर्न मेमो मिलता है या जिस दिन 15-दिन की नोटिस अवधि समाप्त होती है, उस पहले दिन को गिनती करते समय छोड़ (Exclude) दिया जाएगा। इस सिद्धांत को बाद में 5-जजों की संवैधानिक पीठ ने Econ Antri Ltd. v. Rom Industries Ltd. (2014) 11 SCC 769 में भी पुष्ट किया।

लाभ: आपको नोटिस और केस के लिए पूरा 30वां दिन मिलता है।

Yogendra Pratap Singh v. Savitri Pandey, (2014) 10 SCC 713

15 दिन पूरे होने से पहले केस दायर करना अमान्य (Premature Complaint)

सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने फैसला सुनाया कि जब तक देनदार को नोटिस तामील होने के बाद पूरे 15 दिन का समय नहीं बीत जाता, तब तक कोई अपराध गठित नहीं होता। 15 दिन से पहले दायर शिकायत पर कोर्ट संज्ञान नहीं ले सकता।

नियम: हमेशा 16वें दिन या उसके बाद ही कोर्ट में परिवाद दायर करें।

MSR Leathers v. S. Palaniappan, (2013) 1 SCC 177

3 महीने में चेक को एक से अधिक बार जमा करने पर नया 30-दिन का अधिकार

तीन जजों की पीठ ने पुराने फैसले (Sadanandan Bhadran) को पलटते हुए कहा कि चेक की 3 महीने की वैधता के भीतर उसे कई बार बैंक में जमा किया जा सकता है और अंतिम बाउंस के रिटर्न मेमो से 30 दिन में नोटिस भेजकर केस चलाया जा सकता है।

राहत: पहली बार 30 दिन चूकने पर दोबारा चेक लगाकर समय बचाएं।

Sanjabij Tari v. Kishore S. Borcar, 2025 INSC 1158

सितंबर 2025 के नए दिशा-निर्देश: WhatsApp/Email ई-सम्मन व त्वरित निपटारा

सुप्रीम कोर्ट ने 1 नवंबर 2025 से लागू दिशानिर्देशों में आदेश दिया कि धारा 138 मामलों में सम्मन डाक के साथ-साथ WhatsApp, SMS और ईमेल से तुरंत भेजे जाएं, और शुरुआती चरण में समझौता करने पर कम समझौता शुल्क (5% से 10%) लगाया जाए।

प्रभाव: नोटिस व केस में आरोपी का सही WhatsApp नंबर व ईमेल अवश्य दें।

व्यावहारिक उदाहरण • Date-by-Date Statutory Calculation

तारीख-दर-तारीख उदाहरण: ₹5,40,000 के चेक बाउंस में हर समय सीमा की सटीक गणना

आइए एक वास्तविक व्यापारिक उदाहरण से समझें कि तारीखों की गिनती कैसे काम करती है: मान लीजिए जयपुर के कपड़ा व्यापारी राजेश वर्मा को उनके खरीदार ने ₹5,40,000 का चेक दिया जिसकी तारीख 1 अगस्त 2026 है। नीचे देखें कि हर कानूनी समय सीमा किस तारीख को शुरू और समाप्त होती है:

घटना (Event)उदाहरण तारीख (Date)कानूनी नियम के अनुसार अंतिम तिथि (Deadline)
1. चेक पर लिखी तारीख (Cheque Date)1 अगस्त 2026बैंक में जमा करने की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर 2026 (3 महीने की वैधता)
2. बैंक से रिटर्न मेमो मिला (Return Memo Received)10 सितंबर 202610 सितंबर का दिन छोड़ दिया जाएगा; गिनती 11 सितंबर 2026 से शुरू होगी।
3. धारा 138 डिमांड नोटिस भेजने की अंतिम तिथि10 अक्टूबर 2026 तकराजेश ने समय रहते 22 सितंबर 2026 को वकील से स्पीड पोस्ट व WhatsApp नोटिस भिजवा दिया।
4. देनदार को नोटिस प्राप्त हुआ (Notice Delivered)25 सितंबर 202625 सितंबर को छोड़कर 26 सितंबर से 15 दिन गिने गए — भुगतान की अंतिम तिथि: 10 अक्टूबर 2026।
5. वाद कारण (Cause of Action) व कोर्ट केस समय11 अक्टूबर 2026 से शुरूमजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दायर करने की अंतिम तिथि: 10 नवंबर 2026 (1 महीना — Section 142(1)(b))।
परिणाम: चूंकि राजेश वर्मा ने 22 सितंबर को वैधानिक नोटिस भेज दिया था जिसमें धारा 138(b) और 2025 के नए सुप्रीम कोर्ट दिशा-निर्देशों के तहत गिरफ्तारी वारंट व दोगुने जुर्माने (₹10,80,000) की चेतावनी थी, देनदार ने 15-दिन की अवधि खत्म होने से पहले 7 अक्टूबर 2026 को RTGS द्वारा पूरे ₹5,40,000 का भुगतान कर दिया।
विशेष परिस्थितियां • Interactive Scenario Solver

यदि 30 दिन निकल गए हों, देनदार नोटिस न ले, या स्टॉप पेमेंट हो तो क्या करें?

अपनी वर्तमान स्थिति के अनुसार नीचे दिए गए टैब पर क्लिक करें और जानें कि आपके पास कौन सा कानूनी विकल्प उपलब्ध है:

MSR Leathers (2013) 1 SCC 177विशेष परिस्थिति समाधान

रिटर्न मेमो मिले 30 दिन से ज्यादा हो गए, लेकिन चेक की 3 महीने की वैधता अभी बाकी है

समस्या का कारण (Situation):

कई बार देनदार 'एक हफ्ते में पैसे दे दूंगा' कहकर टालता रहता है और इस भरोसे में पीड़ित व्यक्ति बैंक रिटर्न मेमो मिलने के 30 दिनों के भीतर कानूनी नोटिस नहीं भेज पाता।

कानूनी नियम व सुप्रीम कोर्ट निर्णय (Legal Position):

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के फैसले MSR Leathers v. S. Palaniappan (2013) 1 SCC 177 के अनुसार, जब तक चेक अपनी 3 महीने की वैधता (Section 138 Proviso (a)) के भीतर है, उसे बैंक में जितनी बार चाहें प्रस्तुत किया जा सकता है। हर नई प्रस्तुति और नए रिटर्न मेमो से 30 दिन की नई नोटिस अवधि शुरू होती है।

आपको तुरंत क्या करना चाहिए (Action Plan):
  • 1चेक पर लिखी तारीख जांचें — यदि आज की तारीख से 3 महीने पूरे नहीं हुए हैं, तो चेक को तुरंत अपने बैंक में दोबारा जमा (Re-present) करें।
  • 2बैंक से नया 'चेक रिटर्न मेमो' (Fresh Return Memo) प्राप्त करें और उस पर बैंक की मुहर व तारीख सुनिश्चित करें।
  • 3नए रिटर्न मेमो की तारीख से अगले 30 दिनों के भीतर बिना देरी किए वकील के माध्यम से धारा 138 का डिमांड नोटिस भिजवाएं।
जरूरी कानूनी सलाह: सावधानी: यदि आपने पहले बाउंस पर कानूनी नोटिस भेज दिया था और 1 महीने की कोर्ट फाइलिंग अवधि चूक गए, तो कुछ परिस्थितियों में सावधानी आवश्यक है; लेकिन यदि पहले नोटिस नहीं भेजा था तो नया मेमो पूरी तरह से नया अधिकार देता है।
दस्तावेज़ सूची • Pre-Notice & Court Filing Checklist

चेक बाउंस नोटिस भेजने और केस जीतने के लिए 6 अनिवार्य दस्तावेज़

धारा 138 का नोटिस भेजने और बाद में कोर्ट में मुकदमा दर्ज करने के लिए नीचे दिए गए 6 दस्तावेज़ अभी से एक फाइल में सुरक्षित कर लें:

दस्तावेज़ 1

मूल बाउंस चेक (Original Dishonoured Cheque)

मूल चेक अपने पास सुरक्षित रखें और उसकी आगे-पीछे दोनों तरफ की साफ रंगीन स्कैन कॉपी/फोटो अपने फोन व ईमेल में सेव कर लें।

दस्तावेज़ 2

बैंक रिटर्न मेमो (Original Cheque Return Memo)

बैंक द्वारा जारी रिटर्न मेमो जिस पर चेक बाउंस होने की तारीख, कारण और बैंक शाखा की आधिकारिक मुहर (धारा 146 NI Act के तहत प्राथमिक साक्ष्य) हो।

दस्तावेज़ 3

कानूनी डिमांड नोटिस की कार्यालय प्रति (Copy of Legal Notice)

अधिवक्ता के लेटरहेड पर हस्ताक्षरित धारा 138(b) नोटिस जिसमें 15 दिनों के भीतर चेक राशि चुकाने की स्पष्ट मांग की गई हो।

दस्तावेज़ 4

स्पीड पोस्ट रसीद व डिलीवरी ट्रैकिंग (Postal Receipt & Tracking)

मूल डाक रसीद, इंडिया पोस्ट ट्रैकिंग रिपोर्ट (जिसमें डिलीवरी की तारीख दिखे), या ‘Refused’ लिखकर वापस आया बंद लिफाफा।

दस्तावेज़ 5

लेनदेन या उधारी का प्रमाण (Proof of Legally Enforceable Debt)

इनवॉइस, बिल, लोन एग्रीमेंट, बैंक स्टेटमेंट या UPI ट्रांसफर विवरण। यदि आपने दोस्त को उधार दिया था, तो उधार पैसा वापस कैसे लें गाइड भी पढ़ें।

दस्तावेज़ 6 • BSA Section 63

WhatsApp/Email तामील व धारा 63 प्रमाणपत्र (Digital Certificate)

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 (Section 63 BSA, 2023 — पूर्व धारा 65B) के तहत WhatsApp चैट, ईमेल नोटिस और ई-ट्रैकिंग का प्रमाणपत्र।

⚖️ हमारी सेवा का स्पष्ट दायरा (Honest Scope of Service):

LegalRecovery.in क्या करता है: हमारे पंजीकृत एडवोकेट आपके दस्तावेज़ों की जांच करके धारा 138(b) के तहत वैधानिक चेक बाउंस डिमांड नोटिस (₹999 शुल्क में) तैयार करते हैं और उसे देनदार को रजिस्टर्ड स्पीड पोस्ट तथा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (WhatsApp/Email) से तामील कराते हैं, जिससे 15 दिन की भुगतान प्रक्रिया शुरू होती है। क्या शामिल नहीं है: यदि 15 दिन बाद भी देनदार भुगतान नहीं करता और आपको स्थानीय मजिस्ट्रेट कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से धारा 142 का मुकदमा दायर करना पड़ता है, तो कोर्ट फीस और स्थानीय कोर्ट में पैरवी का खर्च इस नोटिस शुल्क में शामिल नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल • Section 138 FAQs in Hindi

चेक बाउंस नोटिस कितने दिन में भेजें — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

चेक बाउंस होने के कितने दिन बाद नोटिस देना चाहिए (Cheque bounce hone ke kitne din baad notice dena chahiye)?▼
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के परंतु (b) (Section 138 Proviso (b) NI Act) के अनुसार, बैंक से 'चेक रिटर्न मेमो' (Cheque Return Memo) प्राप्त होने की तारीख से ठीक 30 दिनों के भीतर देनदार को लिखित वैधानिक डिमांड नोटिस भेजना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट के Saketh India Ltd. v. India Securities Ltd. (1999) 3 SCC 1 फैसले के अनुसार, 30 दिनों की गिनती करते समय जिस दिन बैंक से रिटर्न मेमो मिला है, उस पहले दिन को छोड़ दिया जाता है और अगले दिन से 30 दिन गिने जाते हैं।
चेक बाउंस नोटिस मिलने के बाद देनदार को भुगतान के लिए कितने दिन का समय मिलता है?▼
धारा 138 के परंतु (c) (Section 138 Proviso (c) NI Act) के तहत, देनदार (चेक जारी करने वाले व्यक्ति) को डिमांड नोटिस तामील (Deliver/Receive) होने की तारीख से पूरे 15 दिन का समय भुगतान करने के लिए मिलता है। यदि देनदार इन 15 दिनों के भीतर चेक की पूरी राशि अदा कर देता है, तो उसके विरुद्ध धारा 138 का कोई आपराधिक मुकदमा नहीं बनता।
15 दिन में पैसा न मिलने पर कोर्ट में चेक बाउंस केस कितने दिन में फाइल करना होता है?▼
यदि नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर देनदार भुगतान नहीं करता है, तो 16वें दिन से 'वाद कारण' (Cause of Action) उत्पन्न हो जाता है। धारा 142(1)(b) (Section 142(1)(b) NI Act) के अनुसार, इस 16वें दिन से ठीक 1 महीने (30 दिन) के भीतर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) या मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में धारा 138 का परिवाद (Criminal Complaint) दायर करना अनिवार्य है।
क्या 15 दिन पूरे होने से पहले कोर्ट में चेक बाउंस केस फाइल किया जा सकता है?▼
नहीं। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने Yogendra Pratap Singh v. Savitri Pandey (2014) 10 SCC 713 में स्पष्ट किया है कि नोटिस तामील होने के बाद 15 दिन की भुगतान अवधि पूरी होने से पहले दायर किया गया केस 'समय-पूर्व' (Premature Complaint) माना जाएगा और कोर्ट उस पर संज्ञान (Cognizance) नहीं ले सकता। केस हमेशा 15 दिन बीतने के बाद ही दायर करें।
अगर 30 दिन के अंदर चेक बाउंस नोटिस नहीं भेज पाए तो क्या करें?▼
यदि रिटर्न मेमो मिलने के 30 दिन बीत गए हैं, तो सबसे पहले चेक पर लिखी तारीख देखें। यदि चेक की तारीख से 3 महीने की वैधता (3-Month Validity) अभी बाकी है, तो आप चेक को दोबारा बैंक में जमा (Re-present) करके नया रिटर्न मेमो ले सकते हैं और नए मेमो से 30 दिन का नया समय पा सकते हैं (MSR Leathers v. S. Palaniappan, 2013)। यदि 3 महीने भी बीत चुके हैं, तो आप 3 साल के भीतर Order 37 CPC के तहत सिविल समरी सूट दायर करके ब्याज सहित रकम वसूल सकते हैं।
एक चेक को 3 महीने की वैधता में कितनी बार बैंक में बाउंस कराया जा सकता है?▼
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और धारा 138(a) के नियमों के अनुसार चेक अपनी जारी तिथि से 3 महीने तक वैध रहता है। सुप्रीम कोर्ट के MSR Leathers (2013) 1 SCC 177 निर्णय के अनुसार, इन 3 महीनों के दौरान चेक को बैंक में जितनी बार चाहें जमा किया जा सकता है। अंतिम बार बाउंस होने के रिटर्न मेमो से 30 दिन के अंदर नोटिस भेजकर धारा 138 का केस चलाया जा सकता है।
क्या WhatsApp और ईमेल से भेजा गया चेक बाउंस नोटिस कोर्ट में मान्य है?▼
हां, रजिस्टर्ड स्पीड पोस्ट (Registered Speed Post) के साथ-साथ WhatsApp और ईमेल से नोटिस भेजना पूर्णतः मान्य और अत्यंत प्रभावी है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 (Section 63 of Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) और सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के ऐतिहासिक फैसले Sanjabij Tari v. Kishore S. Borcar (2025 INSC 1158) के तहत इलेक्ट्रॉनिक नोटिस और ई-सम्मन को कानूनी मान्यता दी गई है।
चेक बाउंस केस में अंतरिम मुआवजा (20% Interim Compensation) कब और कैसे मिलता है?▼
परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 143A (Section 143A NI Act) के अंतर्गत, जब आरोपी कोर्ट में अपना अपराध स्वीकार नहीं करता (Pleads Not Guilty), तो मजिस्ट्रेट शिकायतकर्ता को चेक राशि का अधिकतम 20% हिस्सा 'अंतरिम मुआवजे' के रूप में दिलाने का आदेश दे सकते हैं। आरोपी को यह 20% राशि आदेश की तारीख से 60 दिनों (अधिकतम 30 दिन अतिरिक्त) के भीतर जमा करनी होती है।

प्रमुख कानूनी स्रोत, अधिनियम और सुप्रीम कोर्ट संदर्भ (Primary Legal Sources)

  1. परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (Negotiable Instruments Act, 1881 — Sections 138, 139, 141, 142 & 143A) — भारत सरकार (India Code विधायी विभाग)।
  2. सर्वोच्च न्यायालय निर्णय: Sanjabij Tari v. Kishore S. Borcar (2025 INSC 1158, 25 सितंबर 2025) — धारा 138 मामलों में ई-सम्मन, समयबद्ध ट्रायल और संशोधित समझौता शुल्क दिशा-निर्देश।
  3. सर्वोच्च न्यायालय निर्णय: Saketh India Ltd. v. India Securities Ltd., (1999) 3 SCC 1 एवं Econ Antri Ltd., (2014) 11 SCC 769 — 30 दिन की नोटिस समय सीमा और 1 महीने की परिवाद अवधि में पहले दिन को छोड़ने का सिद्धांत।
  4. सर्वोच्च न्यायालय निर्णय: Yogendra Pratap Singh v. Savitri Pandey, (2014) 10 SCC 713 एवं MSR Leathers v. S. Palaniappan, (2013) 1 SCC 177 — 15-दिन की भुगतान अवधि से पूर्व शिकायत की अमान्यता और 3 माह में पुनः प्रस्तुति का अधिकार।
  5. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अधिसूचना DBOD.AML.BC.No.47/14.01.001/2011-12 — चेक और ड्राफ्ट की वैधता अवधि को 6 महीने से घटाकर 3 महीने करने का नियम।
  6. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63 (Section 63 of the Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) — इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (WhatsApp, ईमेल नोटिस व डिजिटल ट्रैकिंग) की स्वीकार्यता।
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