WhatsApp चैट और बैंक ट्रांसफर को वैध कर्ज व लिखित स्वीकृति माना गया
न्यायालय एवं पक्षकार: दिल्ली उच्च न्यायालय (High Court of Delhi) | विकास शर्मा बनाम राहुल मेहता
वादी ने अपने कॉलेज के दोस्त को व्यवसाय विस्तार के लिए ₹4,50,000 नेट बैंकिंग (IMPS) के माध्यम से ट्रांसफर किए। कोई औपचारिक स्टैम्प्ड लोन एग्रीमेंट नहीं था। जब तीन साल की अवधि खत्म होने वाली थी, तो वादी ने WhatsApp पर तकादा किया, जिस पर प्रतिवादी ने लिखा कि 'मैं अगले दो महीने में तुम्हारे ₹4.5 लाख चुका दूंगा'। बाद में प्रतिवादी ने पैसे देने से मना कर दिया और दावा किया कि कोई लिखित समझौता नहीं है।
माननीय उच्च न्यायालय ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (वर्तमान बीएसए धारा 63) और परिसीमा अधिनियम की धारा 18 का संदर्भ लेते हुए माना कि WhatsApp संदेश एक वैध इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड है। अदालत ने फैसला सुनाया कि देनदार द्वारा संदेश में उधारी स्वीकार करने से परिसीमा अवधि (Limitation Period) 3 साल के लिए और बढ़ गई। अदालत ने प्रतिवादी को ₹4,50,000 का पूरा भुगतान 9% वार्षिक ब्याज और ₹25,000 मुकदमे के खर्च के साथ करने का आदेश दिया।